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Friday, 14 November 2014

छोटे छोटे छोटे हम

छोटे छोटे छोटे हम , बड़े काम कर देते हम, 
आसमान में उड़ कर जाऊं, चाँद सितारे छू कर आऊं, 
दादा जी का मन बहेलाऊ , दादी को मैं भजन  सुनाऊँ .,
मम्मी को तंग करते  हम, ......  छोटे छोटे छोटे हम.,
खेल खिलौने पापा लायें, अच्छे अच्छे कपडे लायें,
पहनू उनको परी लगूं मैं, तितली सी रंगीन  लगूं मैं ,
बड़े मजे करते है हम,..........छोटे छोटे छोटे हम.,
परेशान मम्मी हो जाती, मै जागू  औ  उन्हें जगाती,
मुझे नींद तो जरा न आती, उन्हें सुलाती ,
फिर सो जाती., यही मै करती हूँ हरदम,  .............. छोटे छोटे छोटे हम.,

जब भी नाना के घर जाती,
गोद में उनके झट चढ़ जाती,
नाना मुझको केक दिखाते ,
और जनम दिन तुरत मनाते,
कैंडल छोटी एक बुझाती,
औटोमटिक फिर जल जाती ,
लाल हरे फुग्गों को लाकर, 
मुह से उनको खूब फूलाते, 
क्लेपिंग  करते   है फिर हम,........छोटे छोटे छोटे हम.,

जब जाते वो " बत्तू " लाते,
गोद में लेकर मुझे खिलाते,
मम्मी जो रोके नाना को,
तो मम्मी लो डांट पिलाते ,
गोद में ले , खिड़की पर मुझको,
बस स्कूटर, ,कार दिखाते .,
नाना के संग खेले हम ..................छोटे छोटे छोटे हम.,

रंग -बिरंगी चाक का डब्बा,
मुझे दिखा कर खोला डब्बा,
इतनी सारी चाक देख कर,
मै तो हो गई हक्का बक्का ,
स्लेट पे फिर वो चित्र बनाते ,
पेट हाथ पर उसे छपाते ,
बहुत जोर से हंसते हम ...........छोटे छोटे छोटे हम.,

मै नाना कि बड़ी दुलारी,
छोटा घर , पर दिल सौ-वारी ,
थक के बैठूं जब मै हारी,
 उनका बिस्तर, नींद हमारी,
सोती मै थी जगें स्वयं .........छोटे छोटे छोटे हम., 

२९/०५/२०११
पी. डी. बाजपेयी

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