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Saturday, 15 November 2014




 (1)

चमेली  के फूलों का साया करेंगे.
 
उजालों में रह कर , किनारा करेंगे,
निगाहों में रह कर , गुजरा करेंगे.
अगर तौबा ना हों तुम्हारी जुबां से,
तेरी ज़ुल्फ़ को हम संवारा करेंगे.
 
तेरी ज़ुल्फ़ के एक साये के खातिर,
ज़माने कि बातें , गवारा करेंगे.
तेरे नाम कि एक तावीज़ को रख,
 चमेली  के फूलों का साया करेंगे.
 
ज़माना काहे ये नाकारा है बातें,
नाकारा ही बातों में डेरा करेंगे.
अगर तुम नाआयी ज़माने के डरसे,
उठा अपनी मैय्यत को रोया करेंगे.
..........२०/०२/१९७४
            
                 *****
                          
  (२)
 
 आँख ने रोका बहुत क़ल रात भर,
 
पर सुबह होते, ना होते , आंसुओ कि बन गयी  लम्बी डगर.
आंसुओ का गाँव  था ,' ना कोई धाम था,
यूँ कहें , इस हाल में उनका ना कोई काम था,
पर कहीं   से याद की खुशबू उड़ी,
आँख तक आते ना आते, बन गयी मोहक  अत्तर .
आँख ने रोका बहुत..............

प्यार कि टूटी पड़ी शहनाईयों से,
क्यों भला , कोशिश करूं,' सुरीली तान छेड़ूँ?
 आज इस बरसात कि भूरी घटा की,
शंख ध्वनि से , क्यूं मै उसकी राह मोडूं?
क्यूं करून मै आंसुओं से बैर इतंना
(क्यूँ की)ये ही मेरे आज के हैं मौन स्वर .
 
आँख ने रोका बहुत.............,
 
..........०२/०२/1982
                 
                
                     *****
                          

 (3)

कदम आँखों में रख लेंगे.
अगरचे  मुस्कराए आप, समुन्दर की उमंगों से,
मुहब्बत से दुआ करना, की हम तुम साथ रह लेंगे.,

कदम 'गर, आपके बढ़  कर, मेरे घर की तरफ आयें,
 कसम मौला  की, ऐसे में, कदम आँखों में रख लेंगे.
 अकेले आप ही है, अब हमारे ज़हन-ओ-जिगर में.
कोई सुबहा करे ऐसे में, हम आहों में दम लेंगे.
सजाये अनगिनत अरमान, परत रेशम सी, इस दिल में,
ज़रा  तुम फूंक कर देखो, तुरत, हम आँख  भर लेंगे.
कदम बढ़ते नहीं , हम आशिकों के, यूं ही दुनिया में,
 जभी ज़ज्बात टकराएँ, सभी कहते है , मर लेंगे.......
.................१३/०८/१९८५
           


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 (4)

कोयल कूकी और भोर हुई.
 
ओ अधर पहरुए, जाग जरा,
कोयल कूकी और भोर हुई.
 तू इतना थक कर सोया है,
क्या मुझसे कोई भूल हुई?
 
 मधुमास की बातें, यादें हैं,
 मधु के दिन, बीती बातें हैं,
 मेरी पायल की झन्न  झन्न  झन्न,
 मन में पीड़ा भर जाते हैं.
उठ जा, मै तो हूँ इक छुई मुई ..  कोयल कूकी और..........
 
बाबुल का घर तो, अब छुट गाया,
 माँ की ममता- भ्रम टूट गाया,
अब तुझे निछावर, तन - मन है,
ममता का अंकुर, फूट गाया
उर बंद कली अब फूल हुई ,..... कोयल कूकी और...........
 
 सपनों का स्वर साधा हमने,
खुद को पाया,  राधा हमने,
 सब धर्मो से, जो पावन है,
मातृत्व धर्म, साधा हमने.
ये सोच, पलक सुरमई हुई ..  कोयल कूकी और.............
................२७/०४/१९९८
              
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 (5)

वक्त , शायद था लुटेरा

मै तो जब आशिक बना था , थोड़ी सी पी थी, जानिए,
गों कि  , कुछ  हैरानियाँ थी, हालात क्या थी जानिए.
जब दुपट्टा सर से फिसला , आंखे झुकी अंदाज़ से,
 क्या नज़ारा था,  क़यामत रंग लाई जानिए.
सुर्ख रंग, गालों का उसके,  और भी गहरा गाया,
 उस रंग का ही, अक्स दिलपर,  आज भी है जानिए
 उसका आना, और जाना, शोखी लिए,  हर रोज़ ही,
आसमान में ज्यूँ परिंदा,  उड़ रहा था जानिए.
कस्म-ए-वादे नाज़ नखरे, दिल पे कर्जे आज भी ,
मुस्कराना, खिलखिलाना, उसकी अमानत जानिए.
इश्क की बुनियाद थी, था मुहब्बत का जुनून,
ज्वार आया था तभी, आँखे समुन्दर जानिए.
 वक्त कुछ ऐसा मेरा था,  हीरे थे दिन, मोती थी रात,
वक्त, शायद था लुटेरा, सब गए, ये जानिए...
........३१/०३/१९९९.



ये भारत के सितारे हैं,;

कहीं ऐसा न हो , कोई तुम्हारे गम को छू जाये;,
तुम्हारी आँख से गिरते हुए, मोती  को  छू जाए;
कही कोई , कही तृष्णा  तुम्हारे मन में जागी हो;
तो सुख के द्वार परही, कहीं सब कुछ न मिल जाये;
बनी रहती है, जब ख्वाहिश, कदम बढ़ते ही रहते है;
किताबे चार पढ़ कर ही कहीं, पढ़ना ना रुक जाये;
ठहर जाता है जब पानी,ठहरती जब निगाहें हैं;
कोई गोली दवा की, तो , कोई दामन हवा पाए;
ये बच्चे आँख के हैं नूर  ये भारत के सितारे हैं,;
भली बातें इन्हें देना, भले सब कुछ ही छीन जाए.

...पुरुषोत्तम बाजपेयी (....१८/०८/१९८५.)


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