अन्ना पर न हो अत्याचार,
अन्ना को समझो ना भाई , खेतों का तुम खरपतवार,
मुल्क हिला देने की ताकत , अन्ना की सीधी तलवार.
आज देश जो जाग ऊठा है, समझो मनमोहन सरकार,
या तो ढीठ बन गए हो तुम , अथवा मजबूरी में हो यार.
एक विदेशी महिला के प्रति, माथ झुकाते बारम्बार,
जानता की आवाज़ सुनो जी, जनता करती हाहाकार .
आँख मूँद कर ल्शासन करते नहीं देखते भ्रष्टाचार,
बेशर्मी से भाषण देते, सिब्बल जैसे चमचे चार.
भ्रष्टाचार घुसा रग-रग में ,उसी का करते रोज़ प्रचार ,
एक राष्ट्र सेवक के खातिर , पुलिस-फौज है तैयार .
बात समझ लो मनमोहनजी, अन्ना पर न हो अत्याचार,
१५ अगस्त के शुभ अवसर पर, नव- अन्ना हों कई हज़ार,
(१५/०८/२०११ सुबह ९.०० बजे.)
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