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Saturday, 15 November 2014



तेरी आहट, सिन्दूरी रंग लेकर, मुझ तक आती है.
तेरी आहट, सपनों में,
करवट सी बन कर आती है.
नहीं अकेला समझूं मै,
खुद को ऐ मेरे हमदम,
आहट के संग, यादें भी शरमा के,
मुझ तक आती हैं.




खम्भे जैसी हो गयी, हिरोइन की जांघ,
फेरेलाखों कर लिए, फिर भी सूनी मांग,
फिर भी सूनी मांग, अजूबा फ़िल्मी देखो,
असली छोड़ पति, नकली की लाइन देखो.
कहैं “ पुराने ”, नित्य नए, पति होते साईन ,
देखो भैय्या, कितनी लम्बी लग गई लाइन ”

... .... पुरुष....०४/०३/१९८४

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