नेताई दोहे ::-
नौ वर्षों के राज
में, रुपिया पहुंचा साठ,
.फिर भी वे समझा
रहे, सोला दूनी आठ .
आया डालर,वेधडक,
नेताओं का आज,
सही रेट पर भुन
रहा, कलाधन सरताज.
नेवले में, और
सांप में, बढ़ीहै यारी आज,
बारी - बारी से
करें अब दिल्ली में राज.
मीठा मीठा बोलते,
लिए बड़ी मुस्कान,
ऐसी मुफ्तकी भेंट
से, वोट मिलेंगे,जान.
पुरुषोत्तम
बाजपेयी ....१२/०७/२०१३..प्रातः ... ४.३०
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