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Wednesday, 19 November 2014


बिगुल बजाता है::-

अब मिटने का समय तुम्हारा, पास में आता है,
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है.

युवा जगा ही देश के खातिर,
मिट जाएगा देश के खातिर.
मगर मिटाने तुमको !! पहले, शंख बजाता है ...
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है.

कितने अत्याचार कर चुके  !!
कितने तुम अपराध कर चुके !!
लेखाजोखा हाथमें लेकर, अबतो बिगुल बजाता है,
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है.

भ्रष्टाचार बसा है रग में.
पाप कर्म के हो तुम बस में.
गांधी के सपने को कैसे, घात दिखाता है !!!
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है.
स्वच्छ प्रशासन ध्वस्त हो गया,
जीवन सरल, निरस्त हो गया

खून के आंसू आज निकलते, तू अक्रान्ता है;
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है’

पाकिस्तान दबंगी करता,
तू शामे ..   नारंगी करता,
भगत सिंह रोता है, औ’ आज़ाद बिलखता है,
करवट सबकी बदल गई है, समय बताता है.

पुरुषोत्तम बाजपेयी
(०७/०८/२०१३ शाम ४.०० बजे)





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